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_विकास की रकम पर डाका, चुनाव के नाम पर स्टेशनरी में लाखों की बंदरबांट_ _जनपद पंचायत का कारनामा: विकास कार्यों के बजट से बना स्टेशनरी का साम्राज्य__”

_विकास की रकम पर डाका, चुनाव के नाम पर स्टेशनरी में लाखों की बंदरबांट_

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मिथलेश आयम_ कोरबा_“माल-ए-मुफ्त, दिल-ए-बेरहम” कहावत इस समय कोरबा जिले की पोड़ी-उपरोड़ा जनपद पंचायत पर सटीक बैठ रही है। सरकार की ओर से विकास कार्यों के लिए भेजी गई 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग यहां खुलेआम हो रहा है। जनपद पंचायत ने इस राशि को बुनियादी ढांचे, पानी, स्वच्छता और सामुदायिक कार्यों पर खर्च करने के बजाय लाखों रुपये फोटोकॉपी और स्टेशनरी पर उड़ा दिए।

15वें वित्त की राशि का गलत इस्तेमाल_______

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नियमों के मुताबिक, वित्त आयोग की अनुदान राशि को सीधे तौर पर स्टेशनरी और चुनावी कार्यों के लिए खर्च करने की अनुमति नहीं है। इसके लिए विभागीय और निर्वाचन व्यय का अलग मद निर्धारित होता है। बावजूद इसके जनपद पंचायत के सीईओ जयप्रकाश डड़सेना और शाखा प्रभारी लालदेव भगत (संकाय सदस्य) ने नियमों की अनदेखी करते हुए चौहान टेलीकॉम नामक दुकान को लाखों का लाभ पहुंचाया।

पंचायत चुनाव के बाद भी खर्च________!

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यह मामला और भी चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि पंचायत चुनाव 17 फरवरी 2025 को सम्पन्न हो चुके थे। इसके बावजूद 30 अप्रैल 2025 को हुई सामान्य सभा की बैठक में चुनाव संबंधी फोटोकॉपी और स्टेशनरी खर्च को अनुमोदन के नाम पर पास करा लिया गया।
दस्तावेज बताते हैं कि 24 मार्च 2025 को एक ही दिन में चौहान टेलीकॉम से आठ अलग-अलग बिल (क्रमांक 181 से 193) जारी किए गए। इनमें से हर बिल की राशि लगभग 47 से 50 हजार रुपये तक थी। बिल में कुल 1,93,380 फोटोकॉपी दिखाई गईं, जिनका प्रति पेज दर 2 रुपये तय किया गया और कुल बिल 3,86,760 रुपये बना। आश्चर्य की बात यह है कि यह भुगतान भी सीधे 15वें वित्त की राशि से कर दिया गया।

निर्वाचन व्यय का अपना मद, फिर वित्त आयोग क्यों___?

आम तौर पर चुनाव के समय निर्वाचन व्यय से ही स्टेशनरी और फोटोकॉपी का भुगतान होता है। सवाल यह उठता है कि जब चुनाव फरवरी में ही निपट चुके थे, तब मार्च में एक साथ आठ बिल क्यों बनाए गए? अगर वास्तव में फोटोकॉपी और स्टेशनरी का काम हुआ था, तो उसी समय बिल क्यों नहीं लिया गया? एक ही दुकान से एक ही दिन में लाखों की फोटोकॉपी हुई, तो फिर अलग-अलग बिल बनवाने की क्या मजबूरी थी?

मिलीभगत और मनमानी का खेल_____

सूत्र बताते हैं कि जनपद पंचायत के कुछ अधिकारी, कर्मचारी और नेताओं की मिलीभगत से चौहान टेलीकॉम को यह अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इलाके के एक जनप्रतिनिधि का कहना है कि इस तरह के खर्च का उद्देश्य अक्सर नेताओं की खुशामद और उनके निजी कार्यों में धन मुहैया कराना होता है।
उन्होंने कहा— “10-20 हजार की हेरफेर समझ में आ सकती है, लेकिन लाखों का खेल यह दर्शाता है कि मामला गंभीर गड़बड़ी का है। न जाने इस तरह और कितने बिल बनाकर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा चुका होगा।”

अब कार्रवाई की बारी.——-

जनपद पंचायत की इस करतूत ने न केवल वित्त आयोग की मंशा पर पानी फेरा है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की गंभीर आशंका को भी जन्म दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन और उच्च स्तर पर विभाग किस तरह संज्ञान लेते हैं और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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